राजस्थान संवाद के खाते से 34 लाख के ग़बन प्रकरण में संलिप्त फ़र्म कल्चर एंड आर्ट एजुकेशन सोसायटी के एक कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर से जुड़े है तार।
राज सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक अरुण जोशी को पता।
एसीबी में आरोपो से घिरे है। 34 लाख के ग़बन का भुगतान जिन फर्मों को किया इसका राज श्री जोशी को पता । एसीबी से क्यो छुपा रहे ये राज?**राजस्थान संवाद (सूचना एवं जनसंपर्क विभाग) जिसके खातों से 34 लाख रुपयों का ग़बन हुआ है उसे अरुण जोशी एवं तत्कालीन वित्तीय सलाहकार एवं अन्य ने आरटीआई के दायरे से बाहर करने के लिए नोटशीट क्यो चलाई थी? *क्या इस 34 लाख रुपयों के ग़बन को छुपाना चाहते थे?* गौरतलब है कि तत्कालीन प्रमुख शासन सचिव(DIPR) ने इन अधिकारियों के इस कृत्य पर आपत्ति जताई कि "who is the competent authority to decide this?" इस आपत्ति के बाद इन अधिकारियों ने तत्कालीन प्रमुख शासन सचिव को नोटशीट से ही बाहर कर दिया! इसके कुछ समय बाद ही करोड़ों रुपयों के घोटाले में एसीबी में 5 FIR दर्ज हुई। जिसमें से 408/2014 में श्री अरुण जोशी का भी नाम था।माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में भी श्री अरुण जोशी ने अपना नाम FIR से हटाने के लिए एक याचिका दायर की लेकिन कोर्ट ने इच्छित राहत देने से इनकार किया था। *मुख्यमंत्री महोदय की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जिरो टॉलरेंस की नीति का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक श्री अरुण जोशी ने उड़ाया मख़ौल!तत्कालीन वितीय सलाहकार से मिलीभगत कर सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक श्री अरुण जोशी ने राजस्थान संवाद के खाते से किया घोटाला ! मुख्यमंत्री महोदय को प्राप्त शिकायत पर वित्त विभाग को जांच करने के विशेष आदेश दिए। मुख्यमंत्री के आदेश से वित्त विभाग ने राजस्थान संवाद के खाते से ग़बन हुए 34 लाख के घोटाले की जाँच की जाँच में ग़बन होना पाया।वित्त विभाग ने आयुक्त/निदेशक डीआईपीआर को एफआईआर दर्ज कराने के दिये आदेश।लेकिन श्री अरुण जोशी ने एफआईआर दर्ज नही होने दी!सेवानिवृत्ति से पूर्व इनके एवं संलिप्त फर्मों के विरुद्ध एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज की ! राजस्थान संवाद के खाते से 34 लाख का ग़बन प्रकरण सत्यापन को मोहताज !* एसीबी एक साल से कर रही ग़बन प्रकरण पर सत्यापन! एसीबी करेगी एफआईआर दर्ज! *भ्रष्टाचारी मस्त!*
*सेवानिवृत्त भाई, बहन सरकारी नोकरी में पदस्थ रहते हुए । चला रहे फ़र्म सरकारी विभाग के खाते से चुपचाप उठा लिया लाखो का भुगतान कल्चर एंड आर्ट एजुकेशन सोसायटी ने*राजस्थान वाकई में 'ग्रेट' है सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक श्रीअरुण जोशी ने अपने परिवार की इज्जत बचाने के लिए दूसरों की इज्जत से किया खिलवाड़! कल्चर एंड आर्ट एजुकेशन सोसायटी फ़र्म 34 लाख के ग़बन में संलिप्त!गोलमार्केट में छिपा है 34 लाख के ग़बन घोटाले का राज सरकारी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर से जुड़े है तार इसका राज सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक श्री अरुण जोशी को पता चोरी ऊपर से सीनाजोरी तो कोई इनसे सीखे !* *आखिर तथाकथित ईमानदार सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक श्री अरुण जोशी 34 लाख के ग़बन पर चुप क्यो?*
सूचना एवं जनसंपर्क के सेवानिवृत्त एडिशनल डायरेक्टर ने फर्जीवाड़े की इंतहा कर रखी है । उनके पिता के निधन को हुए 2 साल से ऊपर हो गए। अखबार कभी बंद नहीं हुआ यानी कि मरा हुआ पिता अखबार चला रहा था, आज भी चल रहा है, विज्ञापन भी मिल रहे थे विज्ञापन भी नियमित उठाए थे। यह खेल केवल राजस्थान में ही हो सकता है क्योंकि राजस्थान ग्रेट'है। क्या मरा व्यक्ति अखबार चला सकता है? सूचना जनसंपर्क विभाग जिनके अखबार तरीके से चल रहे हैं उनकी तो जांच कर रहा है, क्या इस अखबार की जांच करने में उनकी आंखें फूट जाती है? विभाग के कौनअधिकारी है जिन्होंने इस अखबार की हाजिरी लगातार लगाई।
*जब बाढ़ ही खेत को खाये इस कहावत को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक श्री अरुण जोशी ने यथार्थ किया है। बस अन्वेषण की देरी है। इस अधिकारी ने प्रचार प्रसार की आड़ में राजस्थान संवाद के खाते से 34 लाख का ग़बन घोटाला किया फ़र्म इनके परिवार की !सेवानिवृत्त अतिरिक्त निदेशक श्री अरुण जोशी का कल्चर एंड आर्ट एजुकेशन सोसायटी फ़र्म के मालिक/संचालक से इनका क्या संबंध है? *विगत 2 साल से मृत पिता चला रहे थे परलोक से समाचार पत्र!*